चुनावी हुंकार: उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा का दो दिवसीय दौरा शुरू, बीजापुर गेस्ट हाउस में बैठकों का दौर

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देहरादून : आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा आज अपने दो दिवसीय दौरे पर प्रादेशिक राजधानी देहरादून पहुंचीं। दौरे के पहले ही दिन कुमारी शैलजा ने बीजापुर गेस्ट हाउस में जिला, महानगर अध्यक्षों सहित पार्टी के सभी प्रकोष्ठों और विभागों के साथ मैराथन बैठकें कीं। इस दौरान बीजापुर गेस्ट हाउस में पार्टी के तमाम सीनियर लीडर मौजूद रहे, जहां संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर गंभीर मंथन हुआ।

संगठन सृजन और ब्लॉक इकाइयों की हुई समीक्षा

बैठक के पहले सत्र के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि ‘संगठन सृजन’ अभियान के तहत प्रदेश में जिला इकाइयों और ब्लॉक अध्यक्षों का गठन किया गया था। आज की बैठक में संगठन के हिसाब से सभी जिलों की अब तक की प्रगति और हाल ही में आयोजित हुए पार्टी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई है।

गोदियाल ने कहा कि “प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा आज ही पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग से मुलाकात करेंगी, जिसमें संगठनात्मक ढांचे को धार देने के साथ-साथ आगामी चुनावी रणनीति पर गहन चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, आने वाले समय में जनता के बीच ले जाने वाले पार्टी के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की जा रही है।”

एकजुटता और चुनावी रोडमैप पर रहेगा फोकस

राजनीतिक गलियारों में कुमारी शैलजा के इस दो दिवसीय दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। गुटबाजी को दरकिनार कर पूरी एकजुटता के साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए आलाकमान ने कमर कस ली है।

  • आज का एजेंडा: जिला व महानगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों, विभागों और सेलों (Cells) के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर जमीनी फीडबैक लेना।

  • बुधवार (कल) का कार्यक्रम: दौरे के दूसरे दिन भी प्रदेश प्रभारी उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगी। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों को पूरी मजबूती से लड़ने के लिए एक ‘अभेद्य’ चुनावी रोडमैप तैयार किया जाएगा।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के बाद संगठन में निष्क्रिय चल रहे पदाधिकारियों की जगह नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि चुनाव से ठीक पहले बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका जा सके।

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