नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों को पद की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के साथ ही शीर्ष अदालत में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जबकि स्वीकृत 38 पदों में अब केवल एक पद रिक्त रह गया है। हालांकि, जून महीने में दो जजों के रिटायर होने के बाद न्यायालय में रिक्तियों की स्थिति फिर बदल सकती है। जस्टिस पंकज मिथल 16 जून और जस्टिस जे. के. माहेश्वरी 28 जून को सेवानिवृत्त होंगे।
इन जजों ने ली शपथ
नए नियुक्त जजों में वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं। इन नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को की थी, जिसे केंद्र सरकार ने मात्र चार दिनों के भीतर मंजूरी दे दी।
जजों की संख्या में बढ़ोतरी
हाल ही में सरकार ने अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है। पहले से खाली पदों को मिलाकर कुल छह पद रिक्त थे, जिनमें से पांच अब भर दिए गए हैं।
वी.एस. मोहना की ऐतिहासिक नियुक्ति
वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति को ऐतिहासिक माना जा रहा है। वे जस्टिस इंदु मल्होत्रा (2018) के बाद दूसरी ऐसी महिला हैं, जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से स्नातक मोहना को 2015 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला था। उनकी नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में अब दो महिला जज हैं, जस्टिस वी.एस. मोहना और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना। जस्टिस नागरत्ना 2027 में एक महीने से अधिक समय के लिए भारत की मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगी।