12 साल बाद भारतीय महिला मुक्केबाजी को एशियाड में मिला स्वर्ण
नई दिल्ली। भारत की दिग्गज मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 75 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में लवलीना ने चीन की मुक्केबाज जियाई बाऊ को सर्वसम्मति से 5-0 के अंतर से हराकर भारत के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की।
फाइनल मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा और आक्रामक रहा। दोनों मुक्केबाजों के बीच कई मौकों पर जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। मुकाबले के दौरान चीनी मुक्केबाज के आक्रामक रवैये और कुछ विवादित गतिविधियों को लेकर भी चर्चा हुई। इसके बावजूद लवलीना ने अपना संयम और अनुशासन बनाए रखा।
लवलीना ने पूरे मुकाबले में रणनीति के साथ बॉक्सिंग की और अपने डिफेंस के साथ-साथ सटीक पंचों से जजों पर प्रभाव छोड़ा। मुकाबला समाप्त होने के बाद सभी जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें 5-0 से विजेता घोषित किया गया।
यह भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। लवलीना का स्वर्ण पदक एशियाई खेलों में महिला बॉक्सिंग में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है। इससे पहले दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 2014 के एशियाई खेलों में महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीता था।
इस तरह करीब 12 साल के अंतराल के बाद भारतीय महिला मुक्केबाजी को एशियाड में स्वर्ण पदक मिला है। लवलीना की इस जीत से भारतीय मुक्केबाजी में एक बार फिर नई उम्मीद और उत्साह पैदा हुआ है। फाइनल में दबाव के बीच उनके संयम, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन ने उन्हें स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।
