पश्चिम एशिया संकट: भारत में LPG आपूर्ति पर असर

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है, जिसकी मार अब भारत की होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर साफ दिख रही है। देशभर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की शिकायतें तेज हो गई हैं, जिससे कई शहरों में रेस्टोरेंट और होटल अपनी रसोई चलाने में असमर्थ हो रहे हैं।

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने इस संकट को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। FHRAI के महासचिव जैसन चाको ने पत्र में बताया कि जमीनी स्तर पर गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी रुकावट आ रही है। कई डिस्ट्रीब्यूटर 5 मार्च 2026 के एक कथित सरकारी आदेश का हवाला देकर कमर्शियल सिलेंडर देने से इनकार कर रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट निर्देश जारी करे कि हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, और सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

इसी तरह, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी गंभीर चिंता जताई है। NRAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सप्लायर रेस्टोरेंट्स की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। संगठन ने सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण और हस्तक्षेप की अपील की है। NRAI का कहना है कि भोजन उपलब्ध कराना एक आवश्यक सेवा है, इसलिए गैस की कमी का असर आम नागरिकों तक भी पहुंच सकता है।

यह संकट मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में चल रहे संघर्ष से जुड़ा है, जहां से भारत की अधिकांश एलपीजी आयात होती है। हाल के दिनों में सरकार ने घरेलू उपभोग को प्राथमिकता देते हुए रिफाइनरियों को अधिक उत्पादन का आदेश दिया है और घरेलू सिलेंडरों के लिए बुकिंग गैप 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है, ताकि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सके। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल सिलेंडरों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में कई होटल और रेस्टोरेंट पहले से ही अपने स्टॉक बचाने के लिए ऑपरेटिंग घंटे कम कर रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं। उद्योग का अनुमान है कि यदि स्थिति सुधरी नहीं तो बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जिसका असर पर्यटन और रोजमर्रा के भोजन पर भी पड़ेगा।

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