उत्तराखंड का दो जिलों वाला गांव, पहचान बदली, व्यवस्था नहीं…विकास पर ब्रेक

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  • दिगबीर सिंह बिष्ट

उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल की सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत सौंदी कभी टिहरी जिले का सबसे दूरस्थ गांव माना जाता था। 30 नवंबर 2023 को इस गांव को जनपद उत्तरकाशी में शामिल किया गया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब विकास की राह खुलेगी, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी न होने से गांव आज भी पहचान के संकट से जूझ रहा है।

दो जिलों के चक्कर में ग्रामीण परेशान

वर्तमान स्थिति यह है कि गांव दो जिलों के बीच उलझा हुआ है। कुछ कामों के लिए उत्तरकाशी और कुछ के लिए टिहरी जिले के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों के सरकारी काम अटक गए हैं और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण अब इस असमंजस से तंग आ चुके हैं।

विधानसभा को लेकर भी असमंजस

गांव उत्तरकाशी जिले के अनुसार गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र में आता है, जबकि टिहरी जिले के नजरिए से प्रतापनगर विधानसभा का हिस्सा माना जाता है। इस दोहरी स्थिति के कारण जनप्रतिनिधित्व और विकास योजनाओं में भी बाधाएं आ रही हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि सौंदी को पूरी तरह उत्तरकाशी जिले में शामिल किया जाए।

दस्तावेजों में आज भी टिहरी दर्ज

हालात ऐसे हैं कि आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित कई सरकारी दस्तावेजों में आज भी टिहरी गढ़वाल दर्ज है। इसी कारण विकास योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं कागजों में उलझकर रह गई हैं।

जिलाधिकारी से लगाई गुहार

अपनी समस्याओं को लेकर सौंदी गांव के ग्रामीण जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य से मिले। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि गांव को जल्द पूर्ण रूप से उत्तरकाशी जनपद की व्यवस्था में शामिल किया जाए।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सौंदी गांव को उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड डुंडा में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।

विभागों की व्यवस्था बंटी हुई

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा, बाल विकास और खाद्य विभाग उपतहसील धौंतरी, उत्तरकाशी में शामिल हो चुके हैं, लेकिन कई अन्य व्यवस्थाएं अब भी टिहरी गढ़वाल के तहत संचालित हो रही हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि सभी विभागों का संचालन एक ही जिले से किया जाए।

विकास कार्यों पर लगी रोक

ग्रामीणों का आरोप है कि उत्तरकाशी में शामिल होने के बावजूद अब तक गांव में कोई ठोस विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है। यहां तक कि टिहरी विधायक निधि से स्वीकृत योजनाएं भी अटक गई हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

खराब रास्ता बना बड़ी समस्या

ग्रामीण जयपाल सिंह चौहान के अनुसार पंचायत सौंदी से धौंतरी तक जाने वाला मात्र दो फीट चौड़ा वन विभाग का रास्ता बेहद जर्जर हालत में है। पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है, लेकिन जिम्मेदारी तय न होने से सड़क सुधार का काम भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

उम्मीदों पर टिकी निगाहें

अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के आश्वासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि सौंदी गांव को कब पूरी तरह उत्तरकाशी जनपद की पहचान मिलती है और कब तक ग्रामीणों को विकास की वास्तविक सौगात नसीब होती है।

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