आज लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी बहस, हंगामे के आसार

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज (10 मार्च 2026) दूसरा दिन है। कल (9 मार्च) पहले दिन विपक्ष की ओर से ईरान-इज़राइल संघर्ष (पश्चिम एशिया युद्ध) पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ, जिससे कार्यवाही बाधित रही और सदन स्थगित हो गए।

आज लोकसभा में हंगामे की आशंका बनी हुई है, क्योंकि विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) लाने के लिए संकल्प प्रस्ताव पेश कर सकता है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आरोप है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न देकर “खुला पक्षपात” किया। यह मामला मुख्य रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उठा था, जब राहुल गांधी को बोलने से रोका गया था।

सूत्रों के अनुसार, सदन की अनुमति मिलने पर प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा की शुरुआत करेंगे। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब सरकार पक्ष से अपनी दलीलें रखेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान भी सदन को संबोधित कर सकते हैं।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज दोनों सदनों में 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों (सेकंड बैच) पर बयान पेश करेंगी।

लोकसभा में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्टैंडिंग कमेटी की चौथी रिपोर्ट में सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर बयान देंगे, जो 2024-25 की अनुदान मांगों से जुड़ा है।

राज्यसभा में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा फिर शुरू होगी, जिसमें मंत्री कल भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देंगे। कार्यसूची के मुताबिक, ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 2 अप्रैल तक चलेगा। संसद में जारी तनाव से विधायी कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जबकि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।

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